परम तपस्वी संत त्यागी जी के जन्मदिवस पर दिव्य शुभकामनाएं, जनसेवा और परोपकार को समर्पित है संत जीवन दीन-दुखियों की सेवा,भूखों को भोजन और समस्त जीवों में ब्रह्म का दर्शन ही संत त्यागी जी की साधना का मूल भाव
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़कटनी (मध्य प्रदेश)। तीर्थ क्षेत्र ज्ञान तीर्थ विलायत कलां, जिला कटनी, मध्य प्रदेश में विराजमान परम तपस्वी संत त्यागी जी के पावन जन्मदिवस के अवसर पर उनके प्रति श्रद्धा, भक्ति एवं सम्मान व्यक्त करते हुए मनीषी जी, नौगांव, छतरपुर ने दिव्य शुभकामनाएं अर्पित की हैं। उन्होंने संत त्यागी जी के तपस्वी जीवन, त्याग, करुणा और मानव सेवा के भावों को नमन करते हुए उनके दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना की है।संत त्यागी जी का जीवन दीन-दुखियों की सेवा, जरूरतमंदों की सहायता तथा मानवता के कल्याण के लिए समर्पित संत परंपरा का प्रेरणादायी स्वरूप प्रस्तुत करता है। भूखे को अन्न देना, पीड़ित के दुख को दूर करने का प्रयास करना और प्रत्येक जीव में परमात्मा का दर्शन करना ही सच्ची साधना का सार है। त्याग, तपस्या और परोपकार से परिपूर्ण संत जीवन समाज को प्रेम, सद्भाव, करुणा एवं आध्यात्मिक चेतना का संदेश देता है।
मनीषी जी ने अपनी भावनाओं को काव्यात्मक अभिव्यक्ति देते हुए संत त्यागी जी के प्रति श्रद्धा निवेदित की है। उनकी पंक्तियां संत के सेवाभावी व्यक्तित्व और लोककल्याण की भावना को उजागर करती हैं—
“परम तपस्वी साधु हैं एक, तीर्थ विलायत धाम में।
जन-जन का जो परम हितैषी, लगा राम के काम में॥
दीन-हीन को गले लगाता, पीड़ा उनकी हरता है।
जो भी संभव होता उसको, कर्म सभी वह करता है॥
सर्वस्व न्यौछावर करके अपना, पेट दीन का भरता है।
जो भी दुखिया होता उसका, कष्ट हमेशा हरता है॥
एक भिखारी अन्न बांटकर, भूखों की भूख मिटाता है।
सभी जीव को ब्रह्म मानकर, बलि-बलि उन पर जाता है॥
ऐसे साधु सदा मनीषी, युगों-युगों तक यहां रहें।
जागें स्वयं जगावैं सबको, सबकी जय-जय नित्य कहें॥”
काव्य की इन पंक्तियों में संत त्यागी जी के प्रति गहरी आस्था, उनके परोपकारी जीवन के प्रति सम्मान तथा समाज में आध्यात्मिक जागरण की मंगलकामना अभिव्यक्त होती है। संतों का सान्निध्य मानव जीवन को सदाचार, सेवा और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान करता है। उनका जीवन संदेश देता है कि सच्ची महानता धन-संपत्ति में नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को अपना समझने और यथासंभव उनकी सहायता करने में निहित है।जन्मदिवस के इस पावन अवसर पर मनीषी जी,नौगांव, छतरपुर ने परम तपस्वी संत त्यागी जी के स्वस्थ, दीर्घ एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हुए प्रार्थना की कि उनका तप, त्याग, सेवा और आध्यात्मिक प्रकाश जन-जन को सदैव प्रेरित करता रहे तथा समाज में प्रेम, करुणा और मानवता की भावना निरंतर पुष्पित-पल्लवित होती रहे।
जिजीविषेत् शतं समाः” — संत त्यागी जी दीर्घायु हों, उनका जीवन लोककल्याण और आध्यात्मिक प्रेरणा का प्रकाशपुंज बना रहे।

