अतिक्रमण और बेतरतीब पार्किंग से शहर जाम आजाद चौक से गाटरघाट, चांडक चौक से नदीपार तक वाहनों की लंबी कतारें नगर निगम और यातायात पुलिस की भूमिका पर सवाल
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी/ दिनांक, 2 अक्टूबर 2026शहर में बढ़ता अतिक्रमण, सड़क किनारे वाहनों की बेतरतीब पार्किंग और लगातार बढ़ता यातायात दबाव आम नागरिकों के लिए भारी परेशानी का कारण बन गया है। आजाद चौक से गाटरघाट मार्ग तक वाहनों की लंबी कतारें अब रोजमर्रा की बात हो चुकी हैं। चांडक चौक से नदीपार में रविदास चौराहा मार्ग तक भारी वाहनों की कतार से आम आदमी हलाकान है। आजाद चौक की संकरी सड़कों पर जगह-जगह दोपहिया और चारपहिया वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग के कारण आवागमन के लिए जगह लगातार कम होती जा रही है। मिशन चौक से चांडक चौक तक भी यही स्थिति है, जहाँ सड़क के दोनों ओर वाहनों की पार्किंग और कई स्थानों पर सड़क तक फैला अतिक्रमण यातायात में बड़ी बाधा बन रहा है।
अतिक्रमण नियंत्रण और सार्वजनिक मार्गों को बाधामुक्त रखने में नगर निगम की महत्वपूर्ण भूमिका
फिर भी शहर के प्रमुख मार्गों पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग के बीच नगर निगम की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। यदि कार्रवाई के बाद भी उसी स्थान पर दोबारा अतिक्रमण हो जाता है और सड़क का हिस्सा फिर से घिर जाता है, तो केवल चालान काटना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चालानी कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमणकारियों को दोबारा सड़क किनारे दुकान, ठेला या अन्य सामग्री लगाने से प्रभावी रूप से नहीं रोका जाता। ऐसे में यह जांच का विषय है कि कहीं कार्रवाई के नाम पर अतिक्रमण को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा तो नहीं मिल रहा।
बरसों से शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर
समाचार पत्रों से लेकर राजनीतिक नेतृत्वकर्ता समय-समय पर अपने विचार प्रकट करते रहे हैं। अखबार भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए खबरें उठाते और प्रशासन को सजग करते रहे हैं। लेकिन आज तक शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने की दिशा में न तो कोई मास्टर प्लान बन पाया और न ही कोई संतोषजनक प्रयास हो सका, जिससे आम नागरिकों को लगे कि वास्तव में यातायात में ठोस सुधार हुआ है। आगे भी सुधार की कोई स्पष्ट गुंजाइश दिखाई नहीं दे रही।
यातायात अव्यवस्था का मुख्य कारण
लोगों को नियम-कायदों की पर्याप्त जानकारी न होना और सिस्टम को सही ढंग से चलाने में जिम्मेदार अधिकारियों की असफलता है। वाहन चालकों को दिशा के अनुसार और सीमित गति से वाहन चलाने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। जब कभी वीआईपी प्रोटोकॉल लागू होता है तो पूरी यातायात व्यवस्था को ठप कर दिया जाता है, जबकि आम दिनों में न तो वाहन चालक और न ही यातायात नियंत्रण करने वाले अपनी जिम्मेदारियों का सही निर्वहन कर पाते हैं। कई अधिकारी अखबारों में बड़ी-बड़ी विज्ञप्ति छपवाकर और फोटो खिंचवाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं।सवाल वही का वही है। बीस-तीस साल पहले जहाँ यातायात व्यवस्था थी, आज भी लगभग वही स्थिति बनी हुई है। जबकि आबादी में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है और शहर का घनत्व कई गुना बढ़ गया है, बदलाव की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। आजाद चौक से गाटरघाट, मिशन चौक से चांडक चौक तथा चांडक चौक से रविदास चौराहा तक यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए नगर निगम और यातायात विभाग को समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।

