झोलाछाप डाक्टर को मिले कोरोना वारियर्स का दर्जा शासकीय चिकित्सालय में प्रशिक्षण देकर प्राथमिक उपचार क्लीनिक संचालित करने की मिले अनुमति
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी/ दिनांक, 19 सितंबर 2026 कोरोना काल में देवदूत बने ग्रामीण चिकित्सकों को कोरोना वॉरियर्स,का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है! साथ ही शासकीय चिकित्सालय मे प्रशिक्षण देकर प्राथमिक उपचार क्लीनिक संचालन की अनुमति प्रदान की जाये कोरोना महामारी के संकटकाल में जब देश के बड़े-बड़े अस्पताल मरीजों से पटे पड़े थे और योग्य चिकित्सकों की भारी कमी महसूस हो रही थी, तब ग्रामीण क्षेत्रों में 'आरएमपी' (रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर) यानी ग्रामीण चिकित्सकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लाखों लोगों का जीवन बचाया। आमतौर पर समाज और प्रशासन द्वारा 'झोलाझाप' कहकर उपेक्षित किए जाने वाले इन चिकित्सकों ने संकट के समय अग्रिम पंक्ति (फ्रंटलाइन) में रहकर मरीजों की सेवा की और ग्रामीण इलाकों को बड़ी तबाही से बचा लिया।महामारी के उस दौर में जब बड़े शहरों के डॉक्टर और अस्पताल इलाज देने में असमर्थ साबित हो रहे थे, तब इन ग्रामीण डॉक्टरों ने बिना डरे गांवों में घर-घर जाकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। यदि ये चिकित्सक उस समय पीछे हट जाते, तो भारत में स्थिति भयावह हो सकती थी।
जनहित में उनके इस समर्पण को देखते हुए अब समाज में प्रशासन से एक विशेष मांग की जा रही है।
ओबीसी महासभा का कहना है कि म प्र के पूर्व मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान ने भी वादा किया था कि हम झोलाछाप डाक्टर को प्रशिक्षण देकर रजिस्ट्रेशन प्रदान करेंगे और प्राथमिक उपचार की अनुमति देंगे जिसके लिए अटलबिहारी बाजपेयी विश्वविद्यालय की स्थापना भी की गई! परन्तु आज दिनांक तक यह योजना पूर्णतः नदारद है! खोखले वादे जनता की तकलीफ का कारण बने हुए है

