कागजी प्रक्रिया में उलझा रहा स्टाफ ढीमरखेड़ा क्षेत्र में एंबुलेंस न मिलने से 2 घंटे तड़पती रही गर्भवती, अस्पताल की दहलीज पर तोड़ा दम; जांच के आदेश

कागजी प्रक्रिया में उलझा रहा स्टाफ ढीमरखेड़ा क्षेत्र में एंबुलेंस न मिलने से 2 घंटे तड़पती रही गर्भवती, अस्पताल की दहलीज पर तोड़ा दम;  जांच के आदेश

कागजी प्रक्रिया में उलझा रहा स्टाफ ढीमरखेड़ा क्षेत्र में एंबुलेंस न मिलने से 2 घंटे तड़पती रही गर्भवती, अस्पताल की दहलीज पर तोड़ा दम;  जांच के आदेश

 मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़कटनी।  नौ माह तक सैकड़ों कष्ट सहते हुए एक मां बच्चे को अपनी कोख में पालती है। परिवार नए मेहमान के आगमन की तैयारियों और खुशियों में जुटा होता है, लेकिन स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी और घोर लापरवाही इस खुशी को मातम में बदल रही है। कटनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का आलम यह है कि पिछले 5 महीनों के भीतर एंबुलेंस न मिलने और समय पर इलाज न हो पाने के कारण 8 प्रसूताओं की जान जा चुकी है। ताजा मामला ढीमरखेड़ा तहसील के खमरिया गांव का है, जहां 24 वर्षीय प्रसूता गुलाब बाई कोल ने अस्पताल की दहलीज पर ही दम तोड़ दिया।

2 घंटे तक नहीं आई 108 जननी एंबुलेंस, कागजी प्रक्रियाओं में उलझा रहा स्टाफ

मृतका के पति मोजन कोल के अनुसार, उनकी 9 माह की गर्भवती पत्नी गुलाब बाई को अचानक तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 जननी एक्सप्रेस को फोन किया। कॉल सेंटर से बार-बार आधे से एक घंटे में वाहन भेजने का आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन 2 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई एंबुलेंस नहीं पहुंची

विवश होकर परिजनों ने निजी वाहन किराए पर लिया और प्रसूता को लेकर खमतरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां प्राथमिक इंजेक्शन लगाने के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। दोपहर लगभग 1 बजे परिजन प्रसूता को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां त्वरित इलाज शुरू करने के बजाय उन्हें आधा से एक घंटे तक अस्पताल की कागजी प्रक्रियाओं और कमरों के चक्कर कटवाए गए। जब तक परिजन प्रसूता को डिलीवरी वार्ड तक ले जा पाते, तब तक गुलाब बाई ने दम तोड़ दिया। पति का साफ तौर पर कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती और अस्पताल में तुरंत इलाज मिलता, तो उसकी पत्नी की जान बचाई जा सकती थी। इस संबंध में  कलेक्टर आशीष तिवारी ने कहा, प्रसूता की मृत्यु होने की जानकारी प्राप्त हुई है। मौत किन परिस्थितियों में हुई है, इसकी जांच कराई जाएगी और आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।कागजों में 17, सड़क पर सिर्फ 7 एंबुलेंस वेंटिलेटर पर जिले की आपातकालीन सेवा ​यह कोई पहली घटना नहीं है। जिले में आपातकालीन वाहन सेवाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। आंकड़ों के मुताबिक, कटनी जिले के लिए कुल 17 जननी इमरजेंसी वाहन आवंटित हैं, लेकिन धरातल पर मात्र 7 वाहन ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शेष 10 वाहन कहां हैं या किस स्थिति में हैं, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है। वाहनों की इस भारी कमी का खामियाजा दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

कागजी प्रक्रिया में उलझा रहा स्टाफ ढीमरखेड़ा क्षेत्र में एंबुलेंस न मिलने से 2 घंटे तड़पती रही गर्भवती, अस्पताल की दहलीज पर तोड़ा दम;  जांच के आदेश



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