तीन स्तंभों पर खड़ा शिक्षा का मंदिर—एक पर चोट से पूरी व्यवस्था होगी धरा 30 अगस्त तक TET की अनिवार्यता समाप्त नहीं हुई तो शिक्षक दिवस का बहिष्कार!

तीन स्तंभों पर खड़ा शिक्षा का मंदिर—एक पर चोट से पूरी व्यवस्था होगी धरा 30 अगस्त तक TET की अनिवार्यता समाप्त नहीं हुई तो शिक्षक दिवस का बहिष्कार!

तीन स्तंभों पर खड़ा शिक्षा का मंदिर—एक पर चोट से पूरी व्यवस्था होगी धरा 30 अगस्त तक TET की अनिवार्यता समाप्त नहीं हुई तो शिक्षक दिवस का बहिष्कार!

 मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी /शिक्षा,शिक्षक और शिक्षालय इन तीनों स्तंभों पर शिक्षा व्यवस्था का विशाल भवन खड़ा है इनमें से किसी एक स्तंभ को भी कमजोर किया गया तो पूरी व्यवस्था के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा शिक्षा राष्ट्र की आत्मा है, शिक्षक उस आत्मा का संवाहक है और शिक्षालय वह आधार है जहाँ राष्ट्र का भविष्य निर्मित होता है इसलिए किसी एक पर किया गया प्रहार केवल शिक्षक या विद्यालय पर प्रहार नहीं बल्कि सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर प्रहार है।TET के वर्तमान संकट के लिए शिक्षक दोषी नहीं हैं। जिन सरकारों ने नियुक्ति के नियम बनाए,जिन नीतियों और शर्तों के आधार पर शिक्षकों कीनियुक्तियाँ की गईं और जिन नियमों के अनुरूप शिक्षकों ने वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं,आज उन्हीं शिक्षकों को वर्षों बाद उनकी योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाकर परीक्षा के कठघरे में खड़ा करना न्यायसंगत कैसे हो सकता है?दोष नीति-निर्माताओं का है तो सजा शिक्षकों को क्यों वर्षों की सेवा,अनुभव और हजारों विद्यार्थियों का भविष्य सँवारने वाले शिक्षक से अब यह पूछना कि वह शिक्षक बने रहने योग्य है या नहीं यह केवल एक परीक्षा का प्रश्न नहीं,बल्कि शिक्षक के सम्मान,सेवा-सुरक्षा और भविष्य का प्रश्न है सरकार का सर्वोच्च दायित्व न्याय की रक्षा करना है। इसलिए शिक्षक संयुक्त मोर्चा सरकार से मांग करता है कि अध्यादेश अथवा आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से वर्षों से सेवारत शिक्षकों पर लागू की जा रही TET की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त किया जाए।सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था में TET से उत्पन्न संकट के विरोध में जिले के शिक्षकों ने एक दिवसीय प्रदर्शन कर TET की अनिवार्यता पूर्णतः समाप्त करने की मांग बुलंद की प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने स्पष्ट घोषणा की कि

“30 अगस्त तक TET की अनिवार्यता समाप्त नहीं की गई तो 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का बहिष्कार किया जाएगा और शिक्षक काली पट्टी बाँधकर सरकार के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराएंगे”इस घोषणा को उपस्थित शिक्षकों ने जोरदार समर्थन दिया इसके साथ ही अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर अधिक से अधिक संख्या में दिल्ली पहुँचकर संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की अपील भी की गई।शिक्षकों का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं,बल्कि शिक्षक सम्मान, सेवा-सुरक्षा,न्याय और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य की लड़ाई है।एक दिवसीय प्रदर्शन में शिक्षक नेता प्रमोद मिश्रा,अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा संस्थापक सरमन तिवारी,आशीष उरमलिया,नवनीत चतुर्वेदी, विपिनतिवारी,जे.पी.हल्दकार,रमाशंकर तिवारी,शिवदास यादव,संजय मिश्रा,इलयास खान, अखिलेश पांडेय,रामाधार सोनू सरावगी,मनीष दीक्षित,सुशील तिवारी,शिवानी मिश्रा,रमा यादव, किशन लाल भूमियाँ,गौरीशंकर प्यासी,अजय सिंह,ब्रजेश मिश्रा,रविशंकर पटेल,हरिचरण सिंह,उमेश गर्ग,गुड्डा रैदास,दिलीप द्विवेदी,रोहित तिवारी,दीपक पाटकर,मनोज पांडेय,राकेश पाटकर,मनरमन पांडेय,अनिल पटेल,संजय गर्ग,संजय पांडेय,शेख साबिर, डी.आर.वर्मा,देवेंद्र कुलहरा,देवी सिंह,उपेंद्र शर्मा,बसंत पांडेय एवं रमाशंकर राजू तिवारी सहित सैकड़ों शिक्षक साथी उपस्थित रहे।शिक्षक संयुक्त मोर्चा कटनी ने स्पष्ट किया है कि जब तक TET की अनिवार्यता का संकट समाप्त नहीं होता,तब तक संघर्ष जारी रहेगा शिक्षकों की सरकार से सीधी मांग है “वर्षों की सेवा करने वाले शिक्षकों को परीक्षा के नाम पर अपमानित करना बंद करो।नियम बनाने वालों की भूल की सजा शिक्षकों को मत दो TET की अनिवार्यता तत्काल समाप्त करो और शिक्षक सम्मान एवं सेवा-सुरक्षा सुनिश्चित करो।”

शिक्षक संयुक्त मोर्चा,कटनी

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