सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्थाओं पर जनपद सदस्य ने उठाए सवाल, मरीजों को हो रही भारी परेशानी
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़कटनी। जनपद सदस्य एवं रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार पटेल ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अव्यवस्थित व्यवस्थाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।प्रमोद कुमार पटेल ने बताया कि अस्पताल में पूरे वर्ष स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। भीषण गर्मी के बावजूद मरीजों और उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में पानी की टंकी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से टंकी में पानी नहीं भर पा रहा है, जिससे जलापूर्ति पूरी तरह प्रभावित है।उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष से अधिक समय से अस्पताल के शौचालय एवं स्नानघर में पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और मरीजों के परिजनों को स्वयं बाल्टियों से पानी ढोना पड़ता है। साथ ही प्रसूता महिलाओं के लिए भोजन और नाश्ते की समुचित व्यवस्था भी नहीं होने का आरोप लगाया।पटेल ने बताया कि अस्पताल की कई खिड़कियां अब भी टूटी हुई हैं तथा उनमें जालियां नहीं लगी हैं। इसके कारण जंगली एवं खतरनाक जानवरों के अस्पताल परिसर में प्रवेश का खतरा बना रहता है। परिसर में फैली खरपतवार भी सांप और अन्य विषैले जीव-जंतुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में कई बार खतरनाक जानवर अस्पताल में प्रवेश कर चुके हैं, जिससे नवजात शिशुओं, प्रसूता महिलाओं और मरीजों में भय का माहौल बना रहता है।उन्होंने यह भी कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद मरीज प्रतीक्षालय के अधिकांश पंखे बंद पड़े हैं तथा प्रसव कक्ष और भर्ती वार्ड में एक भी कूलर उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को अत्यधिक गर्मी में उपचार कराना पड़ रहा है।प्रमोद कुमार पटेल के अनुसार अस्पताल का प्रभार बीएमओ डॉ. आनंद अहिरवार के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष में कई बार इन समस्याओं से अवगत कराने के बावजूद केवल आश्वासन और लीपापोती हुई, जबकि समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया।जनपद सदस्य ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल की व्यवस्थाओं में शीघ्र सुधार कर मरीजों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।यदि चाहें, इसे और अधिक खोजी (इन्वेस्टिगेटिव) या संतुलित पत्रकारिता शैली में भी तैयार किया जा सकता है, जिसमें संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष शामिल करने का उल्लेख भी हो।

