लैंटाना खरपतवार बन रही वनों के लिए गंभीर चुनौती, जैव विविधता पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

लैंटाना खरपतवार बन रही वनों के लिए गंभीर चुनौती, जैव विविधता पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव,

लैंटाना खरपतवार बन रही वनों के लिए गंभीर चुनौती, जैव विविधता पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव

 मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़कटनी। लैंटाना (Lantana camara) एक विदेशी आक्रामक खरपतवार है, जो देश के अनेक वन क्षेत्रों में तेजी से फैलकर प्राकृतिक वनस्पतियों और जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसे विभिन्न क्षेत्रों में रायमुनी, पंचफूली अथवा लैंटाना झाड़ी के नाम से भी जाना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लैंटाना अत्यंत तेजी से फैलकर घने झुरमुट बना लेती है, जिससे स्थानीय घास एवं अन्य उपयोगी वनस्पतियों का विकास बाधित हो जाता है। इसके कारण वनों का प्राकृतिक पुनर्जनन प्रभावित होता है तथा अनेक देशी पौधों की प्रजातियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

वन्यजीवों पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लैंटाना के प्रसार से शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिए उपलब्ध प्राकृतिक चारा और खाद्य पौधों की मात्रा कम हो जाती है, जिससे वन पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन प्रभावित होता है। इसके अलावा, सूखे लैंटाना पौधे वनाग्नि की तीव्रता बढ़ाने में भी सहायक होते हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

वन एवं पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लैंटाना के प्रभावी नियंत्रण, नियमित उन्मूलन अभियान तथा स्थानीय वनस्पतियों के संरक्षण एवं पुनरोपण के माध्यम से इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। साथ ही, जनसहभागिता और जागरूकता बढ़ाकर वनों की जैव विविधता एवं प्राकृतिक संतुलन को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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