माधव नगर क्षेत्र में शासकीय खेल परिसर की जमीन में अतिक्रमण का आरोप बहोरीबंद बड़वारा क्षेत्र से भी पहुंची शिकायतें नहीं हो रही कार्यवाही
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी/माधवनगर क्षेत्र के ग्राम पड़रवारा स्थित शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के सामने वर्षों पुराने खेल मैदान पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण कार्य का मामला सामने आया है। भ्रष्टाचार उन्मूलन संगठन द्वारा कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।शिकायत के अनुसार खसरा नंबर 32 की शासकीय भूमि, जिसका उपयोग पिछले 80 से 85 वर्षों से बच्चों और विद्यार्थियों के खेलकूद के लिए किया जाता रहा है, अब कथित रूप से कब्जे की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि मैदान के चारों ओर लगभग 25 फीट ऊंची टीन शेड लगाकर क्षेत्र को बंद कर दिया गया है और अंदर पक्का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, प्लॉट में बोरिंग कराए जाने की भी बात सामने आई है।स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिस स्थान पर कभी बच्चे खेलते-कूदते थे, वहां अब निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। इससे विद्यार्थियों के खेल मैदान खत्म होने का खतरा पैदा हो गया है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की अनदेखी के चलते सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया गया और जिम्मेदार विभाग मौन बने हुए हैं।शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों से उनका खेल मैदान छिन जाएगा। जनसुनवाई में कलेक्टर से मांग की गई है कि तत्काल अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर रोक लगाकर शासकीय भूमि को मुक्त कराया जाए।अब देखना होगा कि प्रशासन बच्चों के खेल मैदान को बचाने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई करता है या फिर सरकारी जमीन पर कब्जे का खेल यूं ही चलता रहेगा।
कार्रवाई न होने से नागरिक व्यथित
जिले में आयोजित होने वाली जनसुनवाई व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम पटीराजा, तहसील बड़वारा एवं बहोरीबंद क्षेत्र के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जा और निर्माण को लेकर एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि काली सड़क से लगी शासकीय भूमि, खसरा नंबर 934 के हिस्से को कथित रूप से अवैध तरीके से बेचकर कुछ लोगों द्वारा मकान निर्माण कराया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कई बार जनसुनवाई और तहसील कार्यालय में आवेदन देने के बावजूद प्रशासनिक अमला सिर्फ आश्वासन देता रहा, जबकि मौके पर निर्माण कार्य जारी है।आवेदकों कमलेश चौधरी, रविशंकर राय सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अनावेदकों द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा कर प्लॉट काटे गए और निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि मामले की शिकायत 23 अक्टूबर 2025 को नायब तहसीलदार न्यायालय में भी की गई थी, लेकिन अब तक कार्रवाई धरातल पर दिखाई नहीं दी।पीड़ितों का कहना है कि वे लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से न तो निर्माण रुकवाया गया और न ही कब्जा हटाने की प्रभावी पहल हुई। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि जनसुनवाई में दिए गए आवेदनों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता आखिर न्याय के लिए कहां जाए। लोगों का आरोप है कि कलेक्टर जनसुनवाई अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, जहां शिकायतें तो सुनी जाती हैं, लेकिन समाधान नहीं निकलता।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और शासकीय भूमि पर कथित अवैध निर्माण के आरोपों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।

