गुरुजी,न्यायालय एवं कलेक्टर के आदेश को दिखा रहे ठेंगा,मेडिकल लीव लेकर कर रहे नेता,गिरी, विभाग को दे,रहे चमका
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़।कटनी। जिले के शिक्षा विभाग में कई शिक्षक ऐसे हैं जो की वेतन तो शिक्षक का लेते हैं मगर बच्चों को शिक्षा देने के बजाय वे लोग नेतागिरी करते हुए दिखाई देते हैं। वर्तमान में एक शिक्षक या फिर यूं कहे कि शिक्षकों के नेताजी, माननीय न्यायालय और कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए मेडिकल लीव लेकर नेतागिरी चमकाने में जुटे हुए हैं। वैसे तो ये माननीय शिक्षक कम नेताजी वर्तमान में मेडिकल लीव पर हैं लेकिन लीव पर होने के बावजूद ये भोपाल में अपनी नेतागिरी का दम भरते दिखाई दे रहे हैं।हम बात कर रहे हैं शिक्षक शिक्षक कम नेता राकेश दुबे की। शिक्षक के पद पर नियुक्त होने के बाद राकेश दुबे ने अपने 27 वर्ष के सेवकाल मे 15 वर्ष तो प्रतिनियुक्ति मे निकाल दिया, बाकी समय मे भी वो कम ही विद्यालय गये होगे, यही वजह है की वे पूर्व में निलंबित भी हो चुके थे। 07 मार्च 2024 को राज्य शिक्षा केंद्र के नियम को ताक मे रखते हुए प्रतिनियुक्ति मे रहते हुए उम्र सीमा 52 वर्ष से अधिक होने के बावजूद भी जिला परियोजना समन्वयक केके डहरिया ने राकेश दुबे को बीएसी के पद पर नियुक्त कर दिया था। जिसके बाद शिकायत होने पर कलेक्टर दिलीप यादव के द्वारा राकेश दुबे की प्रतिनियुक्ति समाप्त करते हुए तत्काल प्रभाव से मूल पद स्थापना (विद्यालय) जाने का आदेश किया गया। परन्तु राकेश दुबे ने तो कसम खा रखी है की वेतन शिक्षक का लेंगे पर शिक्षक का दायित्व पूरा नही करेंगे। 15 जुलाई को जिला कलेक्टर के द्वारा किये गये आदेश के खिलाफ वे न्यायलय की शरण मे जा पहुंचे। वहां उन्होंने काफी प्रयास किया मगर माननीय न्यायालय ने फटकार लगाते हुए 22 जुलाई को उनकी याचिका को ख़ारिज करते हुए कलेक्टर के आदेश को उचित ठहराया।बताया जाता है की इसके उपरांत राकेश दुबे ने चिकित्सा अवकाश (मेडिकल लीव) ली हुई है। मेडिकल लीव लेकर उक्त शिक्षक पूरा समय कलेक्टर, जिला पंचायत, शिक्षा विभाग के कार्यालय मे रहकर नेतागीरी करते है। बताया जाता है की गत 3 अगस्त को भोपाल मे आयोजित किसी कार्यक्रम मे भी वे उपस्थित थे। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या एक बीमार व्यक्ति जो की मेडिकल लीव मे हो ये सब कर सकता है या जिला प्रसाशन को धोके मे रखकर आराम से वेतन का लाभ लेते हुए अपनी नेतागिरी को आराम से चमकाते रह सकता है। आपको याद दिला दे की कुछ समय पहले बड़ागाव के शिक्षक अजय कुमार चौधरी को बिना किसी सक्षम अधिकरी के अवकाश व स्वीकृति के बिना जिला स्तरीय जनसुनवाई मे जाने के कारण कलेक्टर द्वारा उनको निलंबित कर दिया गया था। वहीं दूसरी तरफ।कलेक्टर के अनुमोदन से जिला परियोजना समनवयक प्रेम नारायण तिवारी द्वारा किये गये आदेश के तुरंत बाद बीआरसी मनोज गौतम के द्वारा राकेश दुबे को तत्काल कार्य मुक्त करना था, परन्तु आज तक न तो राकेश दुबे को कार्य मुक्त का आदेश दिया गया न ही वो बीमार जान पड़ते हैं। ऐसा लगता है जैसे बस वो विद्यालय नही जाना चाहते। शिक्षक अजय कुमार चौधरी को समान्य बात पर निलंबन का आदेश थमा दिया गया था जबकि आज तक कार्य मुक्त न करने पर बीआरसी मनोज गौतम और चिकित्सा अवकास् के नाम पर लोक सेवक होते गुमराह करने पर राकेश दुबे पर कार्यवाही क्यो नही की जा रही यह समझ से परे है।
