कटनी के ग्राम पंचायत,गैतरा में मिल कचरे से ग्रामीण एवं राहगीर परेशान,मवेशी बीमार, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
कटनी। मध्य प्रदेश के जिले के ग्राम पंचायत गैतरा में मिल संचालक की मनमानी के कारण ग्रामीणों का जीना मुहाल राहगीरों को आवागमन में भारी समस्या हो रही है। ग्राम पंचायत गैतरा के सरपंच पति और ग्रामीणों ने बताया कि माधव नगर कैंप मिल संचालकों द्वारा दाल का कचरा निकालकर मुख्य सड़क पर फेंका जा रहा है। इस कचरे को खाने से मवेशी बीमार पड़ रहे हैं, साथ ही सड़क पर आवागमन में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या इमलिया के समीप बरौली मोड़ के आगे, क्रेशर की फैक्ट्री और दिलीप बजाज के प्लांट के सामने मुख्य सड़क पर विशेष रूप से गंभीर है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले की शिकायत ग्राम पंचायत, सरपंच और स्थानीय प्रशासन से कई बार की जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मिल संचालक की मनमानी चरम पर है और प्रशासन की निष्क्रियता ने ग्रामीणों के बीच आक्रोश को जन्म दिया है।
ग्रामीणों की शिकायतें और समस्याएँ
गैतरा के निवासियों एवं में रोड से आवागमन करने वाले हर व्यक्ति का कहना है कि मिल से निकलने वाला कचरा सड़क पर बिखरने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि मवेशियों के लिए भी यह घातक सिद्ध हो रहा है। कचरे में मौजूद हानिकारक पदार्थों को खाने से गाय, भैंस और अन्य पशु बीमार हो रहे हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा, सड़क पर फैला कचरा आवागमन में बाधा उत्पन्न कर रहा है। खासकर स्कूली बच्चे और बुजुर्ग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि कचरे के कारण सड़क पर फिसलन और दुर्गंध की स्थिति बनी रहती है। ग्राम पंचायत के सरपंच पति ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय प्रशासन और जिला अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक शिकायत की गई, लेकिन मिल संचालक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण मिल संचालक बेखौफ होकर कचरा फेंक रहे हैं।
कचरे का पर्यावरण और स्वास्थ्य पर प्रभाव
कचरे को खुले में फेंकने से न केवल सड़क की स्थिति खराब हो रही है, बल्कि यह पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन रहा है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 268 और 269 के तहत ऐसी गतिविधियाँ, जो सार्वजनिक उपद्रव या संक्रामक रोग फैलाने का कारण बन सकती हैं, दंडनीय अपराध हैं। इसके बावजूद, प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जाना चिंता का विषय है।
ग्रामीणों की माँग और प्रशासन की निष्क्रियता
ग्रामीणों ने माँग की है कि मिल संचालक पर तत्काल कार्रवाई की जाए और कचरे को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत निपटाने के लिए निर्देश दिए जाएँ। साथ ही, सड़क की नियमित सफाई और कचरा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की माँग भी उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो वे विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। स्थानीय प्रशासन और जिला कटनी के अधिकारियों से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं मिला है। ग्राम पंचायत के सरपंच पतिने बताया कि उन्होंने कई बार जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखा,लेकिन कोई जवाब या कार्रवाई नहीं हुई।
समाधान के लिए सुझाव
तत्काल कार्रवाई
जिला प्रशासन को मिल संचालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। नगर पालिका अधिनियम, 1956 और स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
कचरा निस्तारण व्यवस्था- मिल संचालक को कचरे के उचित निपटान के लिए बाध्य करना होगा। इसके लिए कचरा संग्रहण और रीसाइक्लिंग इकाइयों की स्थापना की जा सकती है।
निगरानी समिति
ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन मिलकर एक निगरानी समिति गठन कर सकते हैं, जो कचरा प्रबंधन और सड़क की स्थिति पर नजर रखे।
जागरूकता अभियान ग्रामीणों और मिल संचालकों के बीच पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाए जाएँ। कटनी के भरौली मोड़ के आगे मिल कचरे की समस्या ने ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित कर दिया है। मवेशियों की बीमारी और आवागमन की दिक्कतों के बीच प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है। यह समय है कि जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्रवाई करें, ताकि ग्रामीणों को राहत मिले और पर्यावरण की रक्षा हो सके।
संपादकीय टिप्पणी प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और मिल संचालक की मनमानी पर अंकुश लगाना होगा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा प्रबंधन को प्राथमिकता देना न केवल पर्यावरण के लिए, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए भी आवश्यक है।
