कटनी में तहसीलदारों का जोरदार विरोध,पटवारीऔं का भी मिला समर्थन,राजस्व संवर्ग विभाजन के खिलाफ धरना,वरिष्ठ अधिवक्ता अमित शुक्ला ने दिया समर्थन

मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़कटनी, (ईएमएस)राजस्व संवर्ग के न्यायिक और गैर-justiceिक विभाजन के विरोध में कटनी जिले के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों का आंदोलन तेज हो गया है। गुरुवार को कटनी कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरने पर बैठे तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को पटवारियों का समर्थन प्राप्त हुआ। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अमित शुक्ला भी धरना स्थल पर पहुंचे और तहसीलदारों की मांगों को जायज ठहराते हुए अपना समर्थन व्यक्त किया।
कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के जिला अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने बताया कि राजस्व अधिकारियों के संवर्ग को न्यायिक और गैर-न्यायिक (कार्यपालिक मजिस्ट्रेट) वर्गों में विभाजित करने के शासन के निर्देशों से पूरा संवर्ग हतोत्साहित है। इस विभाजन योजना से उत्पन्न होने वाली संरचनात्मक, विधिक और व्यावहारिक समस्याओं के बारे में पहले भी शासन को अवगत कराया जा चुका है। शासन ने आश्वासन दिया था कि यह योजना केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू होगी, राजस्व न्यायालयों का विलय नहीं किया जाएगा, और गैर-न्यायिक अधिकारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस आश्वासन के आधार पर संवर्ग ने 20 जुलाई को अपना विरोध स्थगित कर दिया था।
हालांकि, आश्वासन के विपरीत, यह योजना कटनी सहित नौ अन्य जिलों (धार, भिंड, खरगौन, बालाघाट, मंदसौर, देवास, मंडला, रीवा) में लागू कर दी गई और राजस्व न्यायालयों का विलय कर दिया गया, जो निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है। गैर-न्यायिक अधिकारियों को न्यूनतम स्टाफ और संसाधन भी उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे क्षुब्ध होकर संवर्ग ने 26 जुलाई 2025 को राजस्व मंत्री को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं से अवगत कराया। राजस्व मंत्री ने सभी बिंदुओं पर सहमति जताते हुए त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इन परिस्थितियों को देखते हुए कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की प्रांतीय कार्यकारिणी ने आपात बैठक बुलाई। 3 अगस्त को गूगल मीट के माध्यम से 45 जिलों के प्रतिनिधियों की ढाई घंटे की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक विभाजन की योजना पूर्ण रूप से वापस नहीं ली जाती, तब तक राजस्व अधिकारी आपदा प्रबंधन कार्यों को छोड़कर अन्य सभी कार्यों से विरत रहेंगे। अधिकारी जिला मुख्यालयों पर उपस्थित रहेंगे, लेकिन सामूहिक अवकाश या हड़ताल पर नहीं जाएंगे। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि अधिकारी अपने शासकीय वाहनों को जिला प्रशासन को सौंप देंगे, डिजिटल सिग्नेचर के डोंगल सीलबंद कर जिला अध्यक्ष को जमा करेंगे, और आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ देंगे। साथ ही, सभी अधिकारी रोजाना शाम को जिला स्थापना शाखा में संयुक्त उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। संवर्ग का कहना है कि विभाजन का मुख्य आधार कार्यपालिक दंडाधिकारी के कार्यों को बनाया गया है, जिसके कारण 45% राजस्व अधिकारियों को उनके मूल कार्य (राजस्व) से अलग किया जा रहा है। संवर्ग ने 6 अगस्त से जिला मुख्यालयों पर उपस्थित रहकर, आपदा प्रबंधन को छोड़कर सभी कार्यों से विरत रहने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक शासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता।
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ संपादक श्यामलाल सूर्यवंशी
