कटनी,TET,के विरोध में जिले भर के शिक्षकों ने सभी विकासखंडों में किया जोरदार प्रदर्शन,मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन

मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी।टेट संयुक्त संघर्ष समिति एवं राज्य शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिले भर के शिक्षकों ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर सशर्त टीईटी परीक्षा लागू किए जाने के विरोध में कटनी जिले के समस्त विकासखंडों एवं तहसील मुख्यालयों में एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया तथा मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपकर अपना प्रबल विरोध दर्ज कराया। समिति की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में
रमाशंकर तिवारी ने बताया कि कटनी
, रीठी, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, बड़वारा, बरही एवं विजयराघवगढ़ सहित जिले के सभी विकासखंडों में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने उपस्थित होकर शासन के इस निर्णय के विरुद्ध संगठित रूप से आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने स्पष्ट कहा कि वर्षों से नियमित सेवा दे रहे शिक्षकों पर सेवा के लंबे समय बाद नई पात्रता शर्तें लागू करना न्यायसंगत नहीं है तथा इससे शिक्षकों में गहरी चिंता और असुरक्षा की स्थिति निर्मित हुई है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया
वर्ष 2010 में Right to Education Act के प्रावधान प्रभावी हुए तथा उसी अवधि के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) प्रारंभ की गई। अतः वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता, क्योंकि उस समय नियुक्तियां शासन एवं संविधान द्वारा निर्धारित मापदंडों, चयन प्रक्रिया तथा नियमानुसार संपन्न हुई थीं। शिक्षकों ने कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम प्रभावी थे, उन्हीं के आधार पर उन्होंने सेवा ग्रहण की और वर्षों से शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, ऐसे में अब नई परीक्षा की अनिवार्यता थोपना शिक्षकों के अधिकारों का हनन है। समिति ने यह भी कहा कि लंबे समय से सेवा कर रहे शिक्षकों की कार्यक्षमता, अनुभव और शैक्षणिक योगदान स्वयं उनकी पात्रता का प्रमाण है। ऐसे में सशर्त परीक्षा के माध्यम से सेवा को असुरक्षित करना न केवल शिक्षकों के आत्मसम्मान के विपरीत है बल्कि शिक्षा व्यवस्था में अस्थिरता भी उत्पन्न कर सकता है। शिक्षकों ने शासन से मांग की कि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त अथवा शिथिल की जाए, अथवा सरकार द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत कर शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान विभिन्न विकासखंडों में शिक्षकों ने पूर्ण अनुशासन, एकजुटता
और संगठनात्मक शक्ति के साथ अपनी बात रखी। ज्ञापन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला शिक्षकों की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही, जिसने आंदोलन को और अधिक प्रभावी स्वर प्रदान किया। समिति ने आगे बताया कि 24 मार्च को जिले के समस्त शिक्षक पुनः एकजुट होकर व्यापक स्तर पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे तथा शासन तक अपनी मांग को और अधिक मजबूती से पहुंचाएंगे। इसके लिए सभी शिक्षकों से विकासखंड एवं तहसील स्तर पर अधिकतम संख्या में उपस्थित रहने की अपील की गई है। इस आंदोलन को राज्य कर्मचारी संघ, अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा सहित कर्मचारी हितैषी विभिन्न संगठनों ने समर्थन प्रदान किया तथा इसे शिक्षक हितों की रक्षा हेतु आवश्यक कदम बताया।
टेट संघर्ष समिति के संयोजक
आशीष उरमलिया, जिलाध्यक्ष शिवदास यादव, नवनीत चतुर्वेदी, विपिन तिवारी, जे.पी. हल्दकार, रमाशंकर तिवारी,संजय मिश्रा, संजय अग्रवाल,एस के सोलंकी,प्रदीप तिवारी, किशनलाल भूमिया, इलायस खान,अजय सिंह, राकेश पाठक, सुशील तिवारी, सूर्यकांत त्रिपाठी, पीतांबर शुक्ला, दिलीप बाजपेयी, प्रमोद गर्ग, सुरजीत तिवारी, मार्तण्ड सिंह राजपूत,रामभुवन विश्वकर्मा, रोहित दुबे, सुरेश सूर्यवंशी, ब्रजेश मिश्रा, रामबाई कोल, दमयंती डेहरिया, रीना सोनी,उमा यादव, रश्मि तिवारी, राजू भैया सिंह, अनिल पटेल, देवेंद्र कुलहरा,रामप्रसाद कोल, दिनेश पाली सहित अनेक शिक्षकों ने कहा कि समस्या के समाधान तक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा और संवर्गीय एकता बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी शक्ति है।
