पत्रकार सुरक्षा कानून: मध्य प्रदेश में निर्भीक पत्रकारिता की मजबूत मांग, जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के मध्य प्रदेश संयोजक हरिशंकर पाराशर की सक्रिय भूमिका
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़।मध्य प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर उठ रही मांग अब एक राष्ट्रीय स्तर की बहस बन चुकी है। हमले, धमकियां, झूठे मुकदमे और आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे पत्रकारों के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून (Journalist Protection Act) की मांग वर्षों से जोर पकड़ रही है। इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों के साथ-साथ जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया रजिस्टर्ड (Journalist Council of India) के मध्य प्रदेश संयोजक हरिशंकर पराशरभी लगातार सक्रिय हैं। कटनी स्थित वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर पाराशर ने न केवल स्थानीय स्तर पर आवाज उठाई है, बल्कि प्रदेश भर के पत्रकारों को एकजुट कर इस कानून की आवश्यकता पर बल दिया है। आइए, अब तक की प्रमुख गतिविधियों, सरकार के प्रयासों और संगठनों की मांगों पर विस्तार से नजर डालें।
संगठनों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें और हालिया गतिविधियां
मध्य प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग मुख्य रूप से मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ (MPWJU) जिला युवा पत्रकार संघ भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ (IFWJ)और साइबर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (CJA)जैसे संगठनों द्वारा की जा रही है। इन संगठनों ने रैलियां, ज्ञापन सौंपना और प्रेस वार्ताएं आयोजित कर सरकार पर दबाव बनाया है।
2023-2024 1 मई 2023 को भोपाल में विशाल प्रदर्शन और बाइक रैली। पत्रकार कल्याण आयोग गठन की मांग भी शामिल।
2025-2026
फतेहपुर में CJA के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नवनीत रावत और महासचिव शीबू खान ने प्रेस वार्ता कर देशव्यापी पत्रकार सुरक्षा कानून, मीडिया आयोग गठन, अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, मानदेय-पेंशन, स्वास्थ्य-दुर्घटना बीमा और शिक्षा-स्वास्थ्य में रियायत की मांग की।रायसेन में MPWJU ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें पत्रकार भवन भूमि वापसी, श्रद्धा निधि योजना में अधिमान्यता हटाने और हर जिला मुख्यालय पर पत्रकार भवन के लिए निशुल्क भूमि की मांग की गई।विभिन्न जिलों (धार, मंदसौर, नरसिंहपुर) में हमलों के बाद मांग और तेज हुई।
हरिशंकर पाराशर की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है। जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के मध्य प्रदेश संयोजक के रूप में उन्होंने कटनी और आसपास के क्षेत्रों में पत्रकारों की एकजुटता बढ़ाई। 2025 में उन्हें काउंसिल द्वारा सम्मानित भी किया गया। पाराशर नियमित रूप से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाते हैं, ताकि पत्रकारों की आवाज सरकार तक पहुंचे और कानून जल्द लागू हो।सरकार की ओर से अब तक के प्रयास और वर्तमान स्थिति मध्य प्रदेश सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है, लेकिन प्रगति धीमी रही है।
सितंबर 2023
अपर मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय समिति गठित। सदस्यों में प्रमुख सचिव (विधि), माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय का प्रतिनिधि और वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव शामिल। समिति को अन्य राज्यों (छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि) के कानूनों का अध्ययन कर दो माह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश।2023 चुनाव पूर्व, बुजुर्ग पत्रकारों (60+ वर्ष) के लिए 20 हजार रुपये मासिक सम्मान निधि और उपचार सहायता की घोषणा।
फरवरी 2026 (बजट सत्र)
कांग्रेस विधायक विपिन जैन ने विधानसभा में सवाल उठाया कि 2023 के बाद क्या प्रगति हुई? मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने जवाब दिया- “सरकार पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन जारी है, विशेषज्ञों से परामर्श हो रहा है। कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई।”हालिया अपडेट्स (फरवरी 2026): समिति की रिपोर्ट या मसौदा अभी सार्वजनिक नहीं हुआ। अध्ययन जारी है, लेकिन कोई ठोस समय-सीमा नहीं।
क्यों जरूरी है संगठनों और हरिशंकर पाराशर सक्रिय पत्रकारों का समर्थन?
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू हो चुके हैं, जहां हमलों पर त्वरित FIR, सुरक्षा प्रावधान और सजा के प्रावधान हैं। मध्य प्रदेश में भी ऐसा कानून पत्रकारों को निर्भीक बनाएगा, जिससे जनता की आवाज मजबूत होगी।हरिशंकर पाराशर जैसे संयोजक प्रदेश स्तर पर संगठनों को जोड़ रहे हैं। उनकी सक्रियता से स्थानीय पत्रकारों में जागरूकता बढ़ी है। संगठनों की मांग है- कानून में हमले पर 3-7 वर्ष की सजा और जुर्माना।पत्रकार कल्याण आयोग गठन।- स्वास्थ्य-बीमा, पेंशन और आवास सुविधा।
सरकार से अपील
समिति की रिपोर्ट शीघ्र सार्वजनिक करें, मसौदा तैयार कर विधानसभा में पेश करें। हरिशंकर पराशर और अन्य संगठनों के साथ संवाद बढ़ाएं।
पत्रकार सुरक्षा कानून लोकतंत्र की रक्षा का सवाल है। मध्य प्रदेश में जब तक यह लागू नहीं होगा, चौथा स्तंभ कमजोर रहेगा। हरिशंकर पराशर जैसे समर्पित पत्रकारों की मेहनत से उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक कदम उठेंगे। निर्भीक पत्रकारिता ही मजबूत मध्य प्रदेश की नींव है!यह लेख अखबार की ‘सहेली’ स्तंभ के लिए विस्तारित रूप में तैयार किया गया है। नवीनतम घटनाक्रम और हरिशंकर पराशर की भूमिका पर आधारित।

