मध्य प्रदेश: कटनी जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र में आंतरिक विद्रोह और बयानबाजी का दौर, प्रशासनिक मतभेदों ने बढ़ाई विभागीय उथल-पुथल
मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी। मध्य प्रदेश (17 जनवरी 2026): मध्य प्रदेश के कटनी जिले में जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र (District Industries and Trade Centre) कार्यालय में आंतरिक कलह ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभागीय कर्मचारियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर
चल रहा है, जहां एक सहायक कर्मचारी द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ की जा रही बयानबाजी ने पूरे विभाग को सरदर्द बना दिया है। यह मामला न केवल विभागीय मर्यादा को तार-तार कर रहा है, बल्कि प्रशासन के आपसी मतभेदों को भी उजागर कर रहा है, जो राज्य स्तर पर उद्योग विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा सकता है।
घटनाक्रम की शुरुआत आरोप-पत्र से उपजी बगावत
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह विवाद कुछ समय से चल रहा था, लेकिन हाल ही में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग (MSME Department) द्वारा सहायक ग्रेड-2 अजय कुमार सागर के खिलाफ जारी किया गया आरोप-पत्र इसकी चिंगारी बन गया। आरोप-पत्र में सागर पर कार्यशैली में लापरवाही, महत्वपूर्ण दस्तावेजों के प्रबंधन में अनियमितताएं और विभागीय नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सागर को लेखा एवं सामान्य कक्ष का चार्ज सौंपा गया था, जहां से विल (फाइलें) पास करने और लेखापाल के कार्यों का जिम्मा था। लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन
जिम्मेदारियों का पालन करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया
आरोप-पत्र मिलते ही सागर बौखला गए और उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तथा मीडिया के सामने अपने ही विभाग के महाप्रबंधक से लेकर आयुक्त स्तर के अधिकारियों के खिलाफ उल्टे-सीधे बयान देना शुरू कर दिए। एक वायरल वीडियो में सागर सहायक कर्मचारी पर कई तरह के व्यक्तिगत और पेशेवर आरोप लगाते नजर आ रहे हैं, जिसमें उन्होंने शासकीय सेवक की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रखा। विभाग के अन्य कर्मचारियों ने इसकी लिखित शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी है, जिससे पूरा कार्यालय परेशान है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "यह बयानबाजी न केवल विभाग की छवि खराब कर रही है, बल्कि उद्योग केंद्र के दैनिक कार्यों को भी प्रभावित कर रही है।"
प्रशासनिक मतभेदों का गहरा चित्र
क्यों हो रहा है यह बखेड़ा?यह मामला केवल एक कर्मचारी की बगावत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कटनी जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र में व्याप्त प्रशासनिक मतभेदों का प्रतीक बन गया है। सूत्र बताते हैं कि सागर की नियुक्ति और जिम्मेदारियों के आवंटन में शुरू से ही असंतोष था। विभाग में पदोन्नति, कार्यभार विभाजन और संसाधनों के वितरण को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों और जूनियर स्टाफ के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है। उदाहरण के लिए:
कार्यभार का असमान वितरण
लेखा कक्ष और विल पासिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य सागर जैसे सहायक कर्मचारियों पर डाले गए, जबकि वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर पर्यवेक्षण में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है।आरोपों की सच्चाई: सागर ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, पक्षपात और दस्तावेजों के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। हालांकि, विभाग ने इनका खंडन किया है और कहा है कि यह सागर की व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम है। एक अधिकारी ने बताया, "सागर की शिकायतें आधारहीन हैं, लेकिन यह मामला अब आंतरिक जांच का विषय है।"
कर्मचारियों की एकजुटता अन्य कर्मचारियों ने सागर की बयानबाजी के खिलाफ एकजुट होकर शिकायत दर्ज की है। वे मानते हैं कि इससे न केवल विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, बल्कि स्थानीय उद्योगपतियों और व्यापारियों के आवेदनों का निपटारा भी विलंबित हो रहा है।मध्य प्रदेश उद्योग विभाग के नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में आंतरिक जांच समिति गठित की जाती है, लेकिन कटनी केंद्र में देरी से प्रशासनिक कमजोरी का आभास होता है। राज्य स्तर पर भी ऐसे विवाद आम हैं, जहां कर्मचारी संगठन अक्सर पदोन्नति और वेतन विसंगतियों को लेकर हड़ताल या शिकायतें करते हैं। कटनी का यह केस विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यह जिले के औद्योगिक विकास को प्रभावित कर सकता है, जहां लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन देना केंद्र का मुख्य कार्य है।
अनसुलझे रहस्य और भविष्य की संभावनाएं
इस विवाद की कहानी में कई अनसुलझे पहलू हैं, जैसे सागर के आरोपों के पीछे कोई बाहरी साजिश तो नहीं, या विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया में अनियमितताएं। विभागीय सूत्रों का दावा है कि जल्द ही एक पूर्ण जांच रिपोर्ट जारी होगी, जिसमें सागर के बयानों की सत्यता का पता लगाया जाएगा। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो सागर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, जिसमें निलंबन या पदावनति शामिल है। वहीं, यदि अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो यह बड़े प्रशासनिक सुधारों का संकेत दे सकता है।स्थानीय उद्योगपति इस मामले से चिंतित हैं। कटनी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के एक सदस्य ने कहा, "हमारे आवेदन पहले से ही विलंबित हैं, अब यह आंतरिक कलह विकास को और रोक रही है। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।"मध्य प्रदेश सरकार ने उद्योग विभाग को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन ऐसे आंतरिक मतभेद विभाग की विश्वसनीयता को कमजोर कर रहे हैं। यह मामला अन्य जिलों के लिए भी सबक हो सकता है, जहां प्रशासनिक सद्भाव बनाए रखना आवश्यक है। हम इसकी आगे की अपडेट्स पर नजर रखेंगे।

