भू-माफियाओं का दबदबा: कटनी में सार्वजनिक निस्तार स्थल पर कब्जे की साजिश, बेबस प्रशासन के आगे आम नागरिक त्रस्त

 भू-माफियाओं का दबदबा: कटनी में सार्वजनिक निस्तार स्थल पर कब्जे की साजिश, बेबस प्रशासन के आगे आम नागरिक त्रस्त

भू-माफियाओं का दबदबा: कटनी में सार्वजनिक निस्तार स्थल पर कब्जे की साजिश, बेबस प्रशासन के आगे आम नागरिक त्रस्त

मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनीमध्य प्रदेश के कटनी जिले में भू-माफियाओं का रौद्र रूप फिर से बेनकाब हुआ है। शहर के मालवीय गंज वार्ड, पुराना एवं नया गुरुनानक वार्ड क्षेत्र में स्थित प्राचीन सार्वजनिक निस्तार स्थल 'कुलिया' पर प्रभावशाली लोगों द्वारा नाजायज कब्जे की कोशिश तेज हो गई है। यह घटना न केवल स्थानीय निवासियों की पीड़ा को उजागर करती है, बल्कि प्रशासन की नाकामी को भी आईना दिखाती है। वर्षों से उपयोग में आने वाली इस सार्वजनिक संपत्ति को हड़पने की साजिश में शामिल नामजद लोग बेखौफ होकर निर्माण कार्य चला रहे हैं, जबकि आम जनता के पास दस्तावेजी प्रमाण मौजूद होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। स्थानीय निवासियों ने इस संदर्भ में कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, महापौर एवं एसडीएम को शिकायतें भेजी हैं, लेकिन भू-माफियाओं के हौसले बुलंद ही बने हुए हैं। विशेष संवाददाता द्वारा जारी वीडियो और दस्तावेजों में साफ दिखाई दे रहा है कि नसरवान वाड़ा और गजानन कॉम्प्लेक्स के पीछे का यह क्षेत्र दशकों से सार्वजनिक निस्तार स्थल के रूप में जाना जाता रहा है। पुराने मकानों की खिड़कियां-दरवाजे इसी दिशा में खुले हैं, जबकि नए निर्माण भी इसी कुलिया की ओर मुखातिब हैं। ये प्रमाण इस बात के पक्के सबूत हैं कि यह स्थान निजी संपत्ति नहीं, बल्कि समुदाय की साझा धरोहर है। हालांकि, पंकज आहूजा, हासा सहजवानी, धनेश माखीजा एवं अन्य प्रभावशाली लोग छह माह पूर्व इसी स्थान को अपनी निजी जमीन बताकर बाउंड्री वॉल खड़ी करने की कोशिश कर चुके थे। स्थानीय लोगों और नगर निगम की आपत्ति पर तब निर्माण रुका था, लेकिन 12 सितंबर को दोबारा मजदूर बुलाकर काम शुरू कर दिया गया। वीडियो फुटेज में साफ नजर आता है कि कैसे रहवासी और निगम अधिकारी पहुंचे तो काम रुकवाया गया, मगर माफियाओं की जिद थमने का नाम नहीं ले रही। बार-बार की कोशिशें आम नागरिकों को डरा रही हैं, और उनकी आवाज दबाई जा रही है। 

क्षेत्र के निवासी

दीपक गोगवानी, नानक राम आलानी, विजय कुमार अग्रवाल, सुदामा आलानी, मुकेश बिचपुरिया, रवि मोहन सरावगी, शैलेन्द्र सौंधिया, संतोष शर्मा, गोकुल अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल

सहित दर्जनों लोग इस अन्याय से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि शिकायतों के साथ रजिस्ट्री दस्तावेज और पुराने रिकॉर्ड प्रस्तुत किए गए हैं, जहां कुलिया का स्पष्ट उल्लेख है। फिर भी, आरोपी बेखौफ बने हुए हैं। एक निवासी ने पीड़ा जताते हुए कहा, "हमारी आवाज सुनने वाला कोई नहीं। दस्तावेज हमारे पास हैं, लेकिन माफियाओं के आगे प्रशासन चुप्पी साध लेता है। क्या हम गरीबों की जमीन हड़पना अब कानूनी अपराध नहीं रहा?" यह मामला कटनी में भू-माफियाओं के बढ़ते दखल का प्रतीक है। सार्वजनिक जमीनें धीरे-धीरे निजी साम्राज्यों में तब्दील हो रही हैं, और आम जनता असहाय महसूस कर रही है। सवाल उठ रहा है कि जब प्रमाण स्पष्ट हैं और शिकायतें बार-बार पहुंच चुकी हैं, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं? क्या प्रशासन केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित हो गया है? विशेष संवाददाता द्वारा प्राप्त दस्तावेजों से साबित होता है कि यह साजिश सुनियोजित है, और यदि तत्काल हस्तक्षेप न हुआ तो स्थानीय समुदाय की सांसें थम जाएंगी। प्रशासन की यह परीक्षा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि ऐसे मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' नीति को सख्ती से लागू करें, ताकि भू-माफियाओं का यह खेल रुके। निवासियों ने अपील की है कि इस सार्वजनिक कुलिया को स्थायी रूप से बचाया जाए, अन्यथा कटनी जैसे शहरों में कानून का राज खतरे में पड़ जाएगा।

भू-माफियाओं का दबदबा: कटनी में सार्वजनिक निस्तार स्थल पर कब्जे की साजिश, बेबस प्रशासन के आगे आम नागरिक त्रस्त

    मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ संपादक श्यामलाल सूर्यवंशी


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