कारगिल विजय दिवस: शौर्य और बलिदान की अमर गाथा लेखक: हरिशंकर पारशर

 कारगिल विजय दिवस: शौर्य और बलिदान की अमर गाथा लेखक: हरिशंकर पारशर

कारगिल विजय दिवस: शौर्य और बलिदान की अमर गाथा लेखक: हरिशंकर पारशर

मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ कटनी,26 जुलाई, 1999 का दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। यह वह दिन है जब भारतीय सशस्त्र बलों ने कारगिल युद्ध में अभूतपूर्व शौर्य और बलिदान के साथ पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर अपनी मातृभूमि की रक्षा की। कारगिल विजय दिवस न केवल एक सैन्य विजय की कहानी है, बल्कि यह उन वीर जवानों की गाथा है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखा। 

युद्ध का परिदृश्य

1999 की सर्दियों में, पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार कर जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया। उनका मकसद था भारत-पाकिस्तान को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 1A को अवरुद्ध करना और भारत की सैन्य आपूर्ति को बाधित करना। इस घुसपैठ का पता चलते ही भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया, जिसमें हजारों सैनिकों ने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में दुश्मन का सामना किया। 

शौर्य और बलिदान

कारगिल युद्ध की सबसे बड़ी विशेषता थी भारतीय सैनिकों का अदम्य साहस। टाइगर हिल, तोलोलिंग, और द्रास जैसी दुर्गम चोटियों पर सैनिकों ने असंभव को संभव बनाया। कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज पांडे, राइफलमैन संजय कुमार जैसे वीरों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दुश्मन को पीछे धकेला। कैप्टन बत्रा का नारा, “ये दिल मांगे मोर,”आज भी हर भारतीय के दिल में जोश भर देता है। इस युद्ध में 527 सैनिक शहीद हुए और 1300 से अधिक घायल हुए, लेकिन उनकी वीरता ने भारत को गौरवान्वित किया। 

कारगिल विजय का महत्व

कारगिल विजय केवल एक सैन्य जीत नहीं थी, बल्कि यह भारत की एकता, संकल्प और सैन्य शक्ति का प्रतीक थी। इस युद्ध ने विश्व मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। साथ ही, इसने देशवासियों में राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति की भावना को और प्रबल किया। 

आज का संदेश

कारगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा उन वीरों के बलिदान की देन है। यह दिन हमें न केवल उनके शौर्य को सलाम करने का अवसर देता है, बल्कि यह भी प्रेरित करता है कि हम अपने दायित्वों के प्रति सजग रहें। हमें अपने सैनिकों के कल्याण, उनके परिवारों की देखभाल और देश की एकता के लिए निरंतर प्रयास करना होगा। 

आह्वान

आइए, इस कारगिल विजय दिवस पर हम संकल्प लें कि हम अपने देश की रक्षा और प्रगति के लिए हर संभव योगदान देंगे। यह दिन हमें सिखाता है कि चुनौतियां चाहे जितनी बड़ी हों, एकजुटता और साहस के साथ हर बाधा को पार किया जा सकता है। शहीदों को नमन करते हुए हम यह प्रण लें कि उनकी शहादत को कभी भुलाया नहीं जाएगा और हम एक मजबूत, एकजुट भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएंगे। 

कारगिल विजय दिवस: शौर्य और बलिदान की अमर गाथा लेखक: हरिशंकर पारशर

   मध्य प्रदेश समाचार न्यूज़ संपादक श्यामलाल सूर्यवंशी


Post a Comment (0)
Previous Post Next Post